• A Review Under the World Library Indexing Journal
  • ISSN : 2455-6440

आप सभी को सूचित किया जाता है कि सरहद ई पत्रिका के आगामी अंक की बैठक हुई, बैठक में कई अहम मुद्दों पर निर्णय लिए गए, हिंदी में हो रहे Plagiarism को कैसे रोका जाए, हिंदी का वर्चस्व जितना होना चाहिए उतना क्यों नहीं हो रहा है- इसके पीछे क्या-क्या कारण उत्तरदायी है. क्यों मौलिकता की कमी बढ़ रही है. क्यों जॉब में आने के लिए पी.एच.डी. पासपोर्ट बनकर रह गई है. आदि-आदि विषय पर चिंतन करते हए आगामी अंक "21 वी सदी में हिंदी का उत्थान या पतन- तार्किक अभिव्यक्ति "विषय पर अपनी रचनाएँ editor@sarhadepatrika.com पर 30 अप्रेल 2017 तक unicode फॉण्ट में प्रेषित करे.

गुरदयाल सिंह विशेषांक पर आप 20 अप्रेल 2017 तक रचना singh.surjeet886@gmail.com पर किसी भी भाषा में unicode में टंकित करके भेज सकते है.

Our Skills :

इस मंच से साहित्य और संस्कृति के लगभग सभी पहलुओं के साथ युवाओं के सांस्कृतिक उन्नयन का प्रयास किया जाएगा। इन्टरनेट के विशाल जाल में अपनी सरहद ई-पत्रिका समूह के इस मामूली दखल से आप भी जुड़ेंगे तो हमें अच्छा लगेगा।यह सबकुछ हमारे संस्थान के सदस्यों और पत्रिका के विधिवत सम्पादक मंडल के निर्देशन में संपन्न हो रहा है।

Plan for Large Portals

हमारे साथी इस पत्रिका को पूरी तरह गैर-सरकारी और गैर-व्यावसायिक उद्देश्य से सहयोग प्रदान कर रहे हैं. इस विराट् साहित्यिक उद्देश्य को समाज के सामने लाने में भले ही समय लग सकता है, लेकिन असंभव नहीं है. आपके सशक्त सहयोग के बगैर हम समाज को सही दिशा देने की कल्पना ही नहीं कर सकते हैं.

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We Hire People

हम भविष्य में लोगों के विचारों को पोषित करने वाले आयोजनों में कविता कार्यशाला, रंगमंचीय प्रदर्शन, थिएटर कार्यशाला, प्रतिरोध से जुड़े फिल्म फेस्टिवल, कहानी-उपन्यास से सम्बद्ध संगोष्ठियों, राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन करने के लिए विभिन्न लोगों को अपने साथ जोड़ने का मन रखते हैं।

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Donation

पत्रिका आपके सहयोग की अपेक्षा रखती है. साथ ही अगर आप नि:स्वार्थभाव से " सरहद ई-पत्रिका " को किसी तरह का अनुदान या वित्तीय सहयोग देना चाहते हैं तब आपका हार्दिक स्वागत है.


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About Us

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" सरहद ई-पत्रिका " पूर्ण रूप से नि:स्वार्थ, निर्भीक और अत्याचारों के खिलाफ एक ऐसा मंच होगा, जिसमें आम आदमी अपनी बात को लेखनी के माध्यम से विश्व-स्तर पर अभिव्यक्ति प्रदान कर सके. जहाँ तक भाषा की बात है, `सरहद ई-पत्रिका’ मातृभाषा एवं अन्य विशिष्ट भाषाओं का सम्मान करते हुए अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करेगी.

Our Vision

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प्रिंट में निकल रही सैंकड़ों लघु पत्रिकाओं के वर्चस्व और गंभीरता को सलाम करते हुए हमें लगा कि एक पाठक वर्ग इंटरनेट की पीढ़ी का भी है , जिसके साथ चलने के लिहाज से कुछ सार्थक काम करने की गुंजाईश है। किसी तरह के बड़े दावे या वादे तो नहीं हैं फिर भी हम अपनी गति से हम साथ्रक दिशा में काम करना चाहते हैं यह सच है।

What We Offer?

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हमारे परिवार का यह प्रयास रहेगा कि वर्ष में चार अंको में से कम से कम दो अंक न केवल भारतीय समस्याओं पर अपितु विश्वस्तरीय समस्याओं पर केन्द्रित रहेंगे. ‘स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडी’ गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के अनुभवी एवं चर्चित प्रोफेसर सुखदेव सिंह खैरा के अनुसार, “भारत में पत्रिकाओं का जाल बिछा हुआ है. किसी भी नई पत्रिका को स्थान बनाने में कई वर्ष लग जाते हैं.

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